1 Part
329 times read
21 Liked
वृक्ष ही आवरण प्रकृति दे रही है आवाज आओ सपनों मेरी पुकार स्वच्छ रखो मुझे सुन्दर तन दो बस इतनी सी है मेरी गुहार सब मिलकर हाथ बढ़ाओ एक एक सब ...